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Manokamna Purti Kare Durga Maa Mantra Se निश्चित मनोकामना पूर्ति मंत्र दुर्गा माँ मंत्र से

Durga Maa Mantra Se Manokamna Purti Upay in Hindi

मनुष्य अपनी मनोकामना पूर्ति के लिए पूरा जीवन ही बिता देता है । अक्सर हम देखते हैं  कि इसी मनोकामना पूर्ति के लिए मानव मन हमेशा तनावग्रस्त अथवा ख़ुशी में रहता है। अगर उसकी मनोकामना पूर्ति हो जाती है तो कुछ समय के लिए बहुत अधिक प्रसन्न-चित रहता है और यदि मनोकामना पूर्ति नहीं हुई तो हमेशा दुखी, संतप्त और तनाव में ही जीवन बिता देता है।

यदि मूल रूप से देखें  तो पूरा मानव जीवन इसी मनोकामना पूर्ति की लक्ष्य की ओर ही जाता है ।

इसी मनोकामना पूर्ति के लिए आज का मानव केवल आज से ही नहीं बल्कि प्राचीन काल से अथाह परिश्रम करता है। शायद इसीलिए प्राचीन काल से लेकर आज तक मानव अनेक प्रयास  करता है जिससे उसकी मनोकामना पूर्ति हो सके और उसके लिए मनुष्य ने ज्योतिष विद्या से लेकर अंतर्मन जिसे अन्तर्चेतना भी कहते है, उसने आविष्कार करके विश्व को बता दिया कि मनुष्य चाहे तो अपनी योग्यता और सामर्थ्य के बल से क्या कुछ नहीं कर सकता। 

पर आज के घोर भौतिकवादी युग और समय में मानव को इतना धैर्य नहीं रह गया  है कि वह पूजा पाठ, लम्बे अनुष्ठान जो वेद और पुराणों में लिखे हैं  वह पूरा कर सकें। और इसी समय के अभाव और मानव की आलस्य के कारण आजकल के तथाकथित पंडित, ब्राह्मण, ज्योतिष शास्त्री भोली-भाली जनता को पूजा अनुष्ठान की लम्बी विधि दिखा कर डरा देते हैं  और यजमान समय के अभाव के कारण उसी कर्मकांडी पंडित को मंत्र अनुष्ठान के लिए नियत करता है। 

अब इस विधान में कुछ खामी है, वह यह कि जो पंडित या ब्राह्मण को आपने ( यजमान ) ने पैसे देकर नियुक्त किया है क्या वह पंडित/ब्राह्मण स्वयं शुद्ध सात्विक जीवन जी रहा है या केवल दिखावा कर रहा है क्यों कि अगर मंत्र अनुष्ठान (चाहे वह वेद मंत्र हो, मुस्लिम मंत्र हो , शाबर मंत्र हो या कोई भी धर्म या सम्प्रदाय का मंत्र हो ) में थोड़ी सी भी त्रुटि या अशुद्धता रहती है , सात्विक जीवन शैली या ब्रह्मचर्य का अभाव रहता है तो निश्चय ही ऐसा अनुष्ठान आपको कोई लाभ नहीं देगा ।

तो अब यह प्रश्न यह है कि क्या ऐसा कोई मंत्र साधना या विधान नहीं है जिसे एक सामान्य मनुष्य बिना लम्बे अनुष्ठान या पूजा पाठ या ब्राह्मण या पंडित के स्वयं अपनी मनोकामना पूर्ति कर सके ।

अब इस विधान में कुछ खामी है, वह यह कि जो पंडित या ब्राह्मण को आपने ( यजमान ) ने पैसे देकर नियुक्त किया है क्या वह पंडित/ब्राह्मण स्वयं शुद्ध सात्विक जीवन जी रहा है या केवल दिखावा कर रहा है क्यों कि अगर मंत्र अनुष्ठान (चाहे वह वेद मंत्र हो, मुस्लिम मंत्र हो , शाबर मंत्र हो या कोई भी धर्म या सम्प्रदाय का मंत्र हो ) में थोड़ी सी भी त्रुटि या अशुद्धता रहती है , सात्विक जीवन शैली या ब्रह्मचर्य का अभाव रहता है तो निश्चय ही ऐसा अनुष्ठान आपको कोई लाभ नहीं देगा ।

तो अब यह प्रश्न यह है कि क्या ऐसा कोई मंत्र साधना या विधान नहीं है जिसे एक सामान्य मनुष्य बिना लम्बे अनुष्ठान या पूजा पाठ या ब्राह्मण या पंडित के स्वयं अपनी मनोकामना पूर्ति कर सके ।

मनोकामना पूर्ति मंत्र और दुर्गा माँ मंत्र Manokamna Purti aur Durga Maa Mantra

 आज के लेख में मैं आपके सामने उस सरल और शक्तिशाली विधान को  पेश कर रहा हूँ  जो दुर्गा शप्तशति  के ११वें  अध्याय के २६ श्लोकों  से लिया गया है ।

इस दुर्गा माँ मंत्र अनुष्ठान से किसी भी व्यक्ति की  मनोकामना पूर्ति हो सकती है – जो निति नियमों  के अंतर्गत हो और किसी भी धर्म, सम्प्रदाय या व्यक्तिविशेष को हानि न पहुँचता हो , तो निश्चय ही उस व्यक्ति की मनोकामना पूर्ति होगी ही ।

मनोकामना पूर्ति मंत्र और दुर्गा माँ मंत्र अनुष्ठान Manokamna Purti Ke Upay in Hindi

आज मेँ अपना अनुभवगम्य दुर्गा माँ मंत्र का अनुष्ठान बता रहा हु जिसे किसी भी मनुष्य की निति युक्त मनोकमन पूर्ति हो जाती है । यह मंत्र अनुष्ठान किसी भी महीने के किसी भी  शुक्रवार को कर सकते है । 

यह दुर्गा माँ मंत्र अनुष्ठान सुबहः १०:३० बजे से लेकर १२:०० बजे तक पूरा करना होता है । यह समय इसीलिए निर्धारित किया गया है क्योंकि  इसी समय सुषुम्न नाड़ी जागृत होती  है । 
इसीलिए साधक को चाहिए कि  शुक्रवार को ९ से लेकर १२ बजे के बीच जो राहु काल आता है । उस समय ( राहु काल ) को आधार  लेकर ही यह दुर्गा माँ मंत्र का जाप करने से निश्चय ही मनोकामना पूर्ति हो जाती है ।

लेकर ही यह दुर्गा माँ मंत्र का जाप करने से निश्चय ही मनोकामना पूर्ति हो जाती है ।

दुर्गा माँ मंत्र अनुष्ठान विधि Durga Maa Mantra Anusthan

१) शुक्रवार को प्रातःकाल १०:३० बजे से १२:०० बजे के बीच करना है ।

२) साधक को चाहिए स्नान कर धोती पहनकर (पुरुषों  के लिए ) – यदि स्त्री हो तो साड़ी  पहनें ।

३) सामने चौरंगी (बाजोट) पर पीला या लाल आसन रखकर – दुर्गा माता की तस्वीर या मूर्ति स्थापित करें।

४) अब गणेश – गुरु और माँ दुर्गा की पंचोपचार पूजा करे ( कुमकुम , चावल , फूल , धूप दीप और नैवेद्य ) ।

५) अब सरसो का तेल का दीपक जलाये जो पूरे साधना काल तक जलता रहे ।

६) साधक/साधिका स्वयं भी पीली या लाल वस्त्र पहने और लाल या पीले  आसन पर बैठकर साधना शुरु करें  ।

७) अब अपनी दाहिनी हाथ में जल लेकर संकल्प करें  – यथा , “मैं  नीरव हिंगु , भारद्वाज गोत्र में  उपन्न अपनी अमुख मनोकामना पूर्ति के लिए दुर्गा माता मंत्र अनुष्ठान कर रहा हूँ, माँ मुझे आशीर्वाद दो , मेरा मनोकामना पूर्ण हो जाये।

८) अब गणेश मंत्र ( ॐ गं गणपतये नमः II ) की १ माला कं रे ।

९) अब गुरु मंत्र या शिव मंत्र ( ॐ नमः शिवाय ॥) की १ माला करें ।

१०) अब नवार्ण मंत्र की ( ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुंडायै विच्चे नमः ) की १ माला करें ।

११) अब दुर्गा माता की १ माला जाप करें ।

१२) मूल मंत्र – “ज्वालाकरालमत्युग्रमशेषासुरसूदनम्। त्रिशूलं पातु नो भीतेर्भद्रकालि नमोऽस्तु ते॥”

१३) अब पुनः नवार्ण मंत्र की १ माला जाप करें  – यथा – ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुंडायै विच्चे नमः

१४) अब बटुक भैरव की १ माला जाप करे – यथा – ॐ श्री बटुक भैरवाय नमः

१५) अब साधना होने पर – मंत्र को माँ दुर्गा क्षमा प्रार्थना करें  –

माँ दुर्गा मंत्र का १ अन्य मंत्र का स्वरुप

ज्वालाकरालमत्युग्रमशेषासुरसूदनम्।

त्रिशूलं पातु नो भीतेर्भद्रकालि नमोऽस्तु ते॥

हिनस्ति दैत्यतेजांसि स्वनेनापूर्य या जगत्।

सा घण्टा पातु नो देवि पापेभ्यो नः सुतानिव॥

असुरासृग्वसापङ्कचर्चितस्ते करोज्ज्वलः।

शुभाय खड्गो भवतु चण्डिके त्वां नता वयम्॥

(नारायणीस्तुतिः)

माँ दुर्गा मंत्र भावार्थ:

हे भद्रकाली! ज्वालाओं से विकराल दिखता हुआ और सभी अत्यंत उग्र असुरों का संहार करने वाला (आपके कर-कमल में शोभित) वह त्रिशूल, (सब प्रकार के) भय से हमारी रक्षा करें; हम आपको नमन करते है।

हे देवी माँ! जिसकी ध्वनि सारे संसार को व्यापत करती हुई सब दैत्यों के तेज को नष्ट करती हैं, (आपके कर-कमल में शोभित) वह घंटी; हमको अपनी संतान समझ कर, हमारी रक्षा करें।

हे चण्डिका! असुरों के रक्त एवं वसा (चर्बी) से लिप्त (आपके कर-कमल में शोभित) वह आपका खड्ग (आपकी तलवार), (सर्वदा) हमारे लिए शुभदायी हो; हम आपको नमन करते है।

माँ दुर्गा क्षमा मंत्र
अपराधसहस्त्राणि क्रियन्तेऽहर्निशं मया।

दासोऽयमिति मां मत्वा क्षमस्व परमेश्वर।।

गतं पापं गतं दु:खं गतं दारिद्रय मेव च।

आगता: सुख-संपत्ति पुण्योऽहं तव दर्शनात्।।

अर्थ- हे परमेश्वर। मेरे द्वारा रात-दिन हजारों अपराध होते रहते हैं। यह मेरा दास है- ऐसा समझकर मेरे उन अपराधों को आप कृपापूर्वक क्षमा करो। आपके दर्शनों से मेरे पापों और दुखों का नाश हो, दरिद्रता दूर हो और मुझ सुख-संपत्ति प्राप्त हो। ऐसा वरदान दें।

इस प्रकार यह १ दिन की साधना पूर्ण होती है । उचित  यही  रहता है कि  १ मास में  ४ शुक्रवार आते हैं , तो साधक/साधिका को चाहिए कि वह ४/५ शुक्रवार को यही  क्रम दोहरायें – आपकी मनोकामना पूर्ति दुर्गा माँ मंत्र से निश्चित ही पूरी होगी ।

आशा करता हूँ , मेरी आज की  लेखनी से आपकी मनोकामना पूर्ति  हो और आपको माँ दुर्गा का आशीर्वाद मिले ।

काली दर्शनाभिलाषी,

नीरव हींगु 

काली दर्शनाभिलाषी,

आशा रखता हु , मेरी आज कि लेखनी से आपकी मनोकामना पूर्ती हो और आपको माँ दुर्गा का आशीर्वाद मिले ।

काली दर्शनाभिलाषी,

Man spends his whole life for the fulfillment of desires. Often we see that the human mind is always stressed or happy about the fulfillment of this wish. If his wish is fulfilled, then he remains very happy for some time and if the wish is not fulfilled then he always spends life in sorrow, grieving, and stress.

If we see basically, then the whole human life goes towards the goal of fulfilling this wish. For the fulfillment of this wish, not only from today but from ancient times, the human servant of today works tirelessly so that the ambition of his life can be fulfilled.

And perhaps that is why from ancient times till today the human mind makes many efforts so that its wishes can be fulfilled and for that man has invented astrology to the inner which is also called conscience, and has told the world that man wants to be his own. With the help of ability and ability, one can fulfill his wish.

But in today’s very materialistic age and time, man does not have enough patience to complete the worship lessons, long rituals which are written in Vedas and Puranas. 

And at the same time, due to the lack of time and the laziness of the human being, the so-called pundits, Brahmins, and astrologers scare the innocent people by showing them the long method of worship rituals and the host assigns the same ritualistic pandit for the mantra rituals due to lack of time.  

Now there is some flaw in these rituals, that is, the Pandit or Brahmin who has been appointed by you (host) by paying money, is that Pandit/Brahmin himself leading a pure sattvik life or just pretending.

Because if there is even the slightest error or impurity in the mantra ritual (whether it is Veda mantra, Muslim mantra, Shabar mantra, or mantra of any religion or sect), if there is a lack of sattvik lifestyle or celibacy, then definitely Such a ritual will not give you any benefit.

So now this question is in front, is there no such mantra sadhana or Vidhi – which a common man can fulfill his wish without long rituals or worship recitation or brahmin or pandit himself?

Looking at the current time zone and faulty lifestyle, the former Vedic Scholar and Mantra Expert keeping in mind the secret verses of Durga Saptshati presented that the secret method in Durga Saptashati has the power so that any person can fulfill his wish.


Manokamna Purti Mantra and Durga Maa Mantra

In today’s article, I am presenting to you that simple and powerful method which has been taken from the 26 verses of the 11th chapter of Durga Saptsati.

With this Durga Maa Mantra ritual, the wish of any person can be fulfilled – which is under the rules of policy and does not harm any religion, sect, or individual, then surely that person’s wish will be fulfilled.

Manokamna Purti Mantra and Durga Maa Mantra Anusthan 

Today I am narrating the rituals of my experiential Durga Maa Mantra, which fulfills the wishes of any human being. This mantra ritual can also be done on any Friday of the month.

This Durga Maa Mantra ritual has to be completed from 10:30 AM to 12:00 AM. This time has been fixed because Sushumna Nadi gets awakened at this time (Rahu Kalam)

That is why the seeker should have Rahu Kaal which comes between 9 to 12 o’clock on Friday. Taking the basis of that time (Rahu Kaal) and chanting this Durga Maa Mantra definitely fulfills the wish.

Durga Maa Mantra Ritual Method for Manokamna Purti

1) To be done on Friday between 10:30 am to 12:00 am.

2) The seeker should take bath and wear a dhoti (for men) – if a woman, then wears a sari.

3) Put a yellow or red wooden seat known as Chorangi also known as Bajot in Hindi, Establish a picture or idol of Durga Mata.

4) Now do Panchopchar Puja (Kumkum, Rice, Flowers, Dhoop Deep, and Naivedya) to Ganesh – Guru and Mother Durga.

5) Now light a mustard oil lamp that will keep burning for the entire sadhana period.

6) Sadhak/Sadhika himself should wear yellow or red clothes and start sadhana by sitting on a red or yellow seat.

7) Now take water in your right hand and make a resolution – ie, “I am Nirav Hindu, Bhardwaj Gotra, I am performing Durga Mata Mantra ritual for the fulfillment of all my wishes, Mother bless me, may my wish be fulfilled.

8) Now do 1 rosary of Ganesha Mantra (Om Gang Ganapataye Namah II).

9) Now do 1 rosary of Guru Mantra or Shiva Mantra (Om Namah Shivaya Om).

10) Now do 1 rosary of Navarna Mantra (Om Aeim Hreem Kleem Chamundaye Vichhe Namah).

11) Now chant 1 rosary of Durga Mata.

12) Mool Mantra – “Jwala karalm atyugram shesha sur sudanam. Trishulam paatu no bhite bhadrakali namostu te.

13) Now again chant 1 rosary of Navarna Mantra – ie – Om Hreem Klein Chamundayai Viche Namah.

14) Now chant 1 rosary of Batuk Bhairav ​​- as – Om Shri Batuk Bhairavai Namah.

15) Now after doing sadhana – Maa Durga should pray for forgiveness mantra in front of Maa Durga –

Aparadha Sahasrani Kryanteऽ Harnisham Maya.

Dasoyamiti Maa Matva Shmasva Parmeshwar.

Gatam Papam Gatam Dukhkham Gatam Daridra Mev Cha.

Agata: Sukh Sampati Punyoham Tav Darshanat.

Meaning- Oh God. Thousands of crimes are committed by me day and night. This is my slave – Considering this, please forgive those sins of mine. May my sins and sorrows be destroyed with your darshan, may my poverty be removed and I may get happiness and wealth. Give such a boon.

In this way, this 1-day sadhana is completed. If it is possible for you then there are 4 Fridays in a month, so the seeker/saadhika should repeat this sequence of Durga Maa Mantra Sadhana for 4/5th Friday – your wish will be fulfilled by Durga Maa Mantra.

I hope that with my writing today, your wishes are fulfilled and you get the blessings of Maa Durga.

will be fulfilled by Durga Maa Mantra.

I hope that with my writing today, your wishes are fulfilled and you get the blessings of Maa Durga.

Love and Light from Goddess Kali,

Nirav Hiingu

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